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Friday, August 14, 2015

कौन से लड्डू...?

एक आदमी बोट से कही जा रहा था…
अचानक से ज़ोर से हवा चली और उसकी बोट पलट गयी!
उसे तैरना नही आता था...
वो प्रार्थना करने लगा 
“भगवान, अगर मुझे बचा लिया तो मैं गरीबों में 21 किलो लड्डू बाटूंगा”
फिर ज़ोर से हवा चली और एक बड़ी सी लहर उसे ज़मीं पे ले गयी...
वो खड़ा हुआ और हँसते हुए ऊपर देख के बोला
“हाहा, कैसे लड्डू, कौन से लड्डू...?
फिर ज़ोर से हवा चली और एक बड़ी लहर ने उसे वापिस पानी में खीच लिया...
वो फिर चिल्ला के बोला...
“मतलब मैं पूछ रहा था बेसन के या बूंदी के..!!



Thursday, August 13, 2015

धंधा

जज: तुम्हारा जुर्म साबित हो चूका है। 
कल तुम्हे फांसी पे चढ़ाया जायेगा।
.
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पप्पू सोनार : वो तो ठीक है लेकिन उतारा कब जायेगा?
दुकान भी तो खोलनी है, धंधा वैसे ही मंदा चल रहा है।



Tuesday, August 4, 2015

मुफ्त में खानेवाला

एक बार संता, एक कंजूस के यहां शादी में गया।
शादी के पंडाल में अंदर जाने के 2 दरवाजे थे।
एक दरवाजे पर रिश्तेदार और दूसरे पर दोस्त लिखा था।
संता, बहुत फक्र से दोस्त वाले दरवाजे से अंदर गया।
आगे फिर 2 दरवाजे थे, एक पर महिला और दूसरे पर पुरुष लिखा था।
संता पुरुष वाले दरवाजे से अंदर गया।
वहां 2 और दरवाजे थे। एक पर गिफ्ट देने वाले, दूसरे पर बिना गिफ्ट वाले लिखा था।
संता बिना गिफ्ट वाले दरवाजे से अंदर गया।
जब देखा तो वह बाहर गली में खड़ा था और लिखा था : शर्म तो आ नहीं रही होगी!!! 
बड़ा आया था मुफ्त में खानेवाला? अब हवा खा।


Sunday, July 19, 2015

तीन रूपये..

एक करोड़पति मारवाड़ी  मर गया और स्वर्ग का दरवाजा खटखटाने लगा...
..
देव -- कौन हो तुम.....?
करोड़पति -- मैं धरती पर करोड़पति था..
।...
मुझे स्वर्ग में प्रवेश चाहिए..!
देव -- स्वर्ग में रहने लायक तुमने कौन सा काम किया है..?
करोड़पति -- एक बार मैंने भूखी भिखारिन को दो रूपये दिये थे..।
एक बार मेरी कार से टकराकर घायल हुए एक बच्चे को एक रूपया दिया था..
...
.देव -- और कुछ किया ?
करोड़पति -- और कुछ तो याद नही आता...
...
देव (दूसरे देव से ) भाई क्या करे इसका....?
दूसरा देव -- इसके तीन रूपये लौटाकर इसे नरक भेज दो.



Friday, July 17, 2015

मिसकॉल..

संता के घर में आग लग गई। पड़ोसियों ने जैसे-तैसे आग पर काबू पाया। फिर भी काफी सामान जल गया।
एक ने पूछा – तुमने फायर ब्रिगेड को फोन क्यों नहीं किया?
संता – मैंने आठ बार मिसकॉल किया, उधर से जवाब ही नहीं आया।


Saturday, July 11, 2015

महा कंजूस...

एक आदमी महा कंजूस था।
उसने एक शीशी में घी भर कर उसका मुँह बंद किया हुआ था।
जब वह और उसके बेटे खाना खाते तब शीशी को रोटी से रगड़ कर खाना खा लेते थे।
एक बार महा कंजूस किसी काम से बाहर चला गया।
लौटने पर उसने बेटों से पूछा---" खाना खा लिया था। "
बेटे बोले---" हाँ। "
महा कंजूस---" पर शीशी तो मैं अलमारी में बंद करके गया था। "
बेटे बोले---" हमने अलमारी के हैंडल से रोटियाँ रगड़ कर खा लीं। "
महा कंजूस नाराज हो कर बोला---" नालायकों क्या तुम लोग एक दिन बिना घी के खाना नहीं खा सकते थेे। "
बेटे बेहोश .........



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